Tuesday, May 30

प्रवचनामृत 29/05/2017

🌺प्रवचनामृत🌺
🌺जय गुरु सुदर्शन🌺जय गुरु अरुण🌺
🌺त्रिकाल लक्ष्मी🌺
      👉🏻 त्रिकाल ज्ञानी भगवान ने कहा है उसका नाम सिद्धांत है। उन्होंने कहा-हे भव्य जीवो ! आत्मिक लक्ष्मी ही शाश्वत लक्ष्मी है। पौदगलिक लक्ष्मी चंचल है। आती है और चली जाती है। उसको प्राप्त करके भी क्या करेगे ? यह रहने वाली तो नही है। अनंत ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप में रमण करने वाले आत्मा के पास अनंत गुणों का खजाना है वही शाशवत है, सदा करने वाला है। न चोर चुरा सकता है, न राजा ले सकता है। जीवने इस खजाने को देख लिया, जान लिया और पहचान लिया उसके लिए दुसरे सब पौदगलिक सुख तुच्छ है-निस्सार ही प्रतीत होते है। इस तरह प्रभाव से पीछे रहना और स्व में स्थित होना अपनी अक्षय निधि को प्राप्त करना है।