प्रवचनामृत
जय गुरु सुदर्शन जय गुरु अरुण
हार से घबराए ना
हार से घबराए ना
" एसवीरे पंससिए जे णणिविज्जति आदाणाए"
(जो अपनी साधना में 3 द्विष्ण नही होता वही वीर प्रशासित है)
महाभारत का युद्ध करूक्षेत्र में हुआ, पर जीवन भी एक युद्ध क्षेत्र है। तुम्हे निडर योद्धा बनना है। संसार में लड़े बिना काम नही चलता। प्रतिकूलताओ से लड़ना पड़ता है। मुसीबतों से लोहा लेना पड़ता है आप अगर कोई भी घटना जा कोई मुसीबत के आगे झुक गए या घुटने टिका दिए तो सफलता कभी नही पा सकेगे। जीवन में आई चुनौतियों का मुकाबला करो। तुम्हे इस निराश के चक्र से बाहर निकलना होगा कि में कुछ नही कर सकता। अपने साहसो को फोलादी बनाईए और आज ही चल पड़िए। खुशिया तुम्हारा इंतजार कर रही है। कुदरत भी उनका साथ देती है जो एक संकल्प पूर्व की विकास पथ पर रखते है।
क्रमश:
