Wednesday, May 31

प्रवचनामृत 30/05/2017

प्रवचनामृत

जय गुरु सुदर्शन जय गुरु अरुण

हार से घबराए ना

" एसवीरे पंससिए जे णणिविज्जति आदाणाए"
   (जो अपनी साधना में 3 द्विष्ण नही होता वही वीर प्रशासित है)
      महाभारत का युद्ध करूक्षेत्र में हुआ, पर जीवन भी एक युद्ध क्षेत्र है। तुम्हे निडर योद्धा बनना है। संसार में लड़े बिना काम नही चलता। प्रतिकूलताओ से लड़ना पड़ता है। मुसीबतों से लोहा लेना पड़ता है आप अगर कोई भी घटना जा कोई मुसीबत के आगे झुक गए या घुटने टिका दिए तो सफलता कभी नही पा सकेगे। जीवन में आई चुनौतियों का मुकाबला करो। तुम्हे इस निराश के चक्र से बाहर निकलना होगा कि में कुछ नही कर सकता। अपने साहसो को फोलादी बनाईए और आज ही चल पड़िए। खुशिया तुम्हारा इंतजार कर रही है। कुदरत भी उनका साथ देती है जो एक संकल्प पूर्व की विकास पथ पर रखते है।  
क्रमश:

Tuesday, May 30

पूज्य गुरुदेव का संभावित विहार कार्यक्रम


प्रवचनामृत 29/05/2017

🌺प्रवचनामृत🌺
🌺जय गुरु सुदर्शन🌺जय गुरु अरुण🌺
🌺त्रिकाल लक्ष्मी🌺
      👉🏻 त्रिकाल ज्ञानी भगवान ने कहा है उसका नाम सिद्धांत है। उन्होंने कहा-हे भव्य जीवो ! आत्मिक लक्ष्मी ही शाश्वत लक्ष्मी है। पौदगलिक लक्ष्मी चंचल है। आती है और चली जाती है। उसको प्राप्त करके भी क्या करेगे ? यह रहने वाली तो नही है। अनंत ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप में रमण करने वाले आत्मा के पास अनंत गुणों का खजाना है वही शाशवत है, सदा करने वाला है। न चोर चुरा सकता है, न राजा ले सकता है। जीवने इस खजाने को देख लिया, जान लिया और पहचान लिया उसके लिए दुसरे सब पौदगलिक सुख तुच्छ है-निस्सार ही प्रतीत होते है। इस तरह प्रभाव से पीछे रहना और स्व में स्थित होना अपनी अक्षय निधि को प्राप्त करना है।