Wednesday, May 31

प्रवचनामृत 30/05/2017

प्रवचनामृत

जय गुरु सुदर्शन जय गुरु अरुण

हार से घबराए ना

" एसवीरे पंससिए जे णणिविज्जति आदाणाए"
   (जो अपनी साधना में 3 द्विष्ण नही होता वही वीर प्रशासित है)
      महाभारत का युद्ध करूक्षेत्र में हुआ, पर जीवन भी एक युद्ध क्षेत्र है। तुम्हे निडर योद्धा बनना है। संसार में लड़े बिना काम नही चलता। प्रतिकूलताओ से लड़ना पड़ता है। मुसीबतों से लोहा लेना पड़ता है आप अगर कोई भी घटना जा कोई मुसीबत के आगे झुक गए या घुटने टिका दिए तो सफलता कभी नही पा सकेगे। जीवन में आई चुनौतियों का मुकाबला करो। तुम्हे इस निराश के चक्र से बाहर निकलना होगा कि में कुछ नही कर सकता। अपने साहसो को फोलादी बनाईए और आज ही चल पड़िए। खुशिया तुम्हारा इंतजार कर रही है। कुदरत भी उनका साथ देती है जो एक संकल्प पूर्व की विकास पथ पर रखते है।  
क्रमश: