Thursday, June 1

प्रवचनामृत 31/05/17

जय गुरु सुदर्शन जय गुरु अरुण

हार से घबराए ना

आप ने चीटियों को चलते देखा होगा कि वो कैसे आगे बढती है। उनमे से एक चीटी की राह पर यो ही ऊँगली रख कर रोककर देखिए। वह रुकेगी नही, ऊगली की चारो और घूमते हुए ढूढेगी की रस्ता कहा है। उसके रास्ते पर चाहे कितने रोड़े अटकाए वह किसी न किसी तरह अपनी यात्रा जारी रखेगी, मरकर गिर जाने तक वो अपना उत्साह नही छोडती। और न उम्मीद छोडती है।
       संकल्प जीत है संकल्प वो शक्ति है चाँद भी सामने होता है। संकल्पी के लिए कोई भी मंजिल हजारो km दूर नही होती, बलकि उसकी मंजिल उसके कदमो तले होती है।
क्रमश :