Friday, June 2

प्रवचनामृत 01/06/2017

जय गुरु सुदर्शन जय गुरु अरुण

हार से घबराए ना

जिन्दगी जीने के दो तरीके है। एक जो हो रहा है :- उसे होने दो। उसे स्वीकार करो और वदरित करो। दूसरा :- जो हो रहा है अगर वो गलत हो रहा है तो उसे बदल डालो उसके खिलाफ आवाज उठाओ।
     आपकी छत्त के ऊपर जरा सी भी मिट्टी और थोड़ी सी नमी मिल जाए तो उसके लिए उतना ही काफी है। वनस्पति अपने को वही उगने की कोशिश करने लगेगी। दो पत्ते पैदा करके सूर्य की उर्जा निकलेगी। जहाँ वह रहती है वहाँ से 60-70 फुट नीचे तक जमीन की तलाश करके अपनी जडो को नीचे ले जाएगी।
  क्रमश: